The Power of 7 Yoga Chakras – कहते हैं कि हमारे शरीर के भीतर एक ऐसी ऊर्जा बहती है जिसे देखा नहीं जा सकता, लेकिन महसूस जरूर किया जा सकता है। यही ऊर्जा सात अलग-अलग बिंदुओं से होकर गुजरती है—इन बिंदुओं को योग में चक्र कहा गया है। हर चक्र अपनी एक खास भूमिका निभाता है: कोई हमें स्थिरता देता है, कोई रचनात्मकता, कोई आत्मविश्वास, और कोई प्रेम का एहसास। जब ये सातों चक्र खुले और संतुलित रहते हैं, तो जीवन सहज रूप से बहने लगता है—मन हल्का, शरीर ऊर्जावान और विचार स्पष्ट हो जाते हैं। पर जब इनमें से कोई एक चक्र भी असंतुलित होने लगता है, तो ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है और व्यक्ति भीतर से बोझिल, तनावग्रस्त या अस्थिर महसूस करता है। योग की खूबसूरती यही है कि यह हमें इन चक्रों को समझने, उन्हें जगाने और उनके माध्यम से अपने जीवन को संतुलित करने की कला सिखाता है।
Power of 7 Yoga Chakras
1. मूलाधार चक्र (Root Chakra – Muladhara)
रीढ़ की हड्डी के आधार पर स्थित, यह चक्र योग में स्थिरता का आधार माना जाता है।
किससे जुड़ा है: सुरक्षा, ग्राउंडिंग, आत्मविश्वास
असंतुलन होने पर: डर, बेचैनी, असुरक्षा
योग उपाय: ताड़ासन, पर्वतासन, ग्राउंडिंग मेडिटेशन।
2. स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra – Svadhisthana)
नाभि के नीचे मौजूद यह चक्र हमारी भावनाओं और क्रिएटिविटी का केंद्र है।
किससे जुड़ा है: आनंद, रचनात्मकता
असंतुलन होने पर: चिड़चिड़ापन, प्रेरणा की कमी
योग उपाय: भुजंगासन, कपालभाति, जल संतुलन बनाए रखना।
3. मणिपुर चक्र (Solar Plexus Chakra – Manipura)
नाभि के पास स्थित यह चक्र योग में “एनर्जी पावरहाउस” कहलाता है।
किससे जुड़ा है: इच्छाशक्ति, निर्णय क्षमता
असंतुलन होने पर: आत्मविश्वास की कमी, lethargy
योग उपाय: नौकासन, अग्निसार क्रिया, सूर्य नमस्कार।
4. अनाहत चक्र (Heart Chakra – Anahata)
हृदय के पास स्थित यह चक्र प्रेम और करुणा का योगिक स्रोत है।
किससे जुड़ा है: प्यार, दया, भावनात्मक संतुलन
असंतुलन होने पर: भावनात्मक तनाव
योग उपाय: भुजंगासन, हृदय खोलने वाले स्ट्रेच।
5. विशुद्ध चक्र (Throat Chakra – Vishuddha)
यह चक्र गले में स्थित है और योग में अभिव्यक्ति का केंद्र माना जाता है।
किससे जुड़ा है: संप्रेषण, सत्य बोलने का साहस
असंतुलन होने पर: बोलने में हिचक, throat blockage
योग उपाय: ऊँ जप, सिंहासन, गहरी श्वास।
6. आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra – Ajna)
भौंहों के बीच स्थित यह चक्र योग में “इंट्यूशन सेंटर” के रूप में जाना जाता है।
किससे जुड़ा है: ध्यान, अंतर्ज्ञान
असंतुलन होने पर: भ्रम, मानसिक तनाव
योग उपाय: ध्यान, त्राटक, mindful breathing।
7. सहस्रार चक्र (Crown Chakra – Sahasrara)
सिर के शीर्ष पर स्थित यह चक्र आध्यात्मिक ऊर्जा का सर्वोच्च योग केंद्र है।
किससे जुड़ा है: आत्मज्ञान, शांति, ऊर्जात्मक जुड़ाव
असंतुलन होने पर: मानसिक थकान, दिशा की कमी
योग उपाय: ध्यान, मौन अभ्यास, मंत्र जप।
(Yoga )योग और चक्र संतुलन: क्यों जरूरी है?
योग केवल शरीर को नहीं, बल्कि ऊर्जा को भी संतुलित करता है। जब चक्र खुले और सक्रिय रहते हैं, तो—
तनाव कम होता है
भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है
ध्यान और एकाग्रता बढ़ती है
मानसिक स्पष्टता आती है
आत्मविश्वास स्वाभाविक रूप से बढ़ता है
इसीलिए कहा जाता है कि योग का अभ्यास सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि पूरे जीवन को संतुलित करता है।
चक्र संतुलन के लिए Beginner-Friendly Yoga Routine
10 मिनट Deep Breathing
15–20 मिनट Yoga Asanas (सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, ताड़ासन)
5 मिनट ओम् जप
रात में 5 मिनट Gratitude Journaling
यह छोटी-सी योग दिनचर्या भी चक्रों को संतुलित करने के लिए काफी है।
निष्कर्ष
चक्र कोई रहस्य नहीं, बल्कि हमारे भीतर ऊर्जा के प्राकृतिक केंद्र हैं। योग का नियमित अभ्यास इन चक्रों को सक्रिय, शुद्ध और संतुलित बनाता है। जब चक्र ऊर्जा सही दिशा में बहती है, तो जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगते हैं।
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