Bread – आज के समय में ब्रेडऔर पाव हमारी रोज़ाना की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। सुबह की जल्दी हो या शाम की चाय, ब्रेड हमारे घर में हमेशा मौजूद रहती है। इसकी आसानी और सस्तापन इसे लोकप्रिय बनाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि रोज़ाना ब्रेड का सेवन शरीर पर धीरे-धीरे गंभीर असर डाल सकता है। खासकर मैदा से बनी सफेद ब्रेड, जो पोषण में कम और कैलोरी में ज़्यादा होती है, लंबे समय में हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
ब्रेड के बढ़ते सेवन पर चेतावनी
bread खाने की आदत जितनी सामान्य दिखती है, उतनी ही स्वास्थ्य के नजरिए से चिंताजनक भी मानी जा रही है। रोज़ bread खाने से शरीर पर कई छुपे हुए प्रभाव पड़ते हैं, जिनका अंदाज़ा अक्सर लोगों को देर से होता है। खासकर रिफाइंड मैदा से बनी bread शरीर को तेजी से ऊर्जा तो देती है, लेकिन यह ऊर्जा थोड़े समय के लिए ही रहती है, जिसके बाद फिर से भूख बढ़ जाती है।
रोज़ bread खाने से वजन बढ़ने का जोखिम
रोज़ाना bread का सेवन वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। bread में मौजूद कार्बोहाइड्रेट जल्दी पच जाते हैं और ब्लड शुगर को तेजी से ऊपर ले जाते हैं। यह उतार-चढ़ाव शरीर को बार-बार खाने के लिए प्रेरित करता है, जिससे फैट जमा होने लगता है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि bread को रोज़ नाश्ते में शामिल करने से पेट के आसपास फैट तेज़ी से बढ़ सकता है।
bread और पाचन संबंधी समस्याएँ
bread में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है, खासकर सफेद bread में। फाइबर की कमी होने के कारण यह पाचन तंत्र को कमजोर कर सकती है। गैस, कब्ज़, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याएँ आमतौर पर उन्हीं लोगों में देखी जाती हैं जो नियमित रूप से bread का सेवन करते हैं। मैदा पेट में भारीपन पैदा करता है और पाचन की गति को धीमा कर देता है।
bread में मौजूद प्रिज़र्वेटिव्स का शरीर पर असर
बाज़ार में मिलने वाली अधिकांश bread लंबे समय तक ताज़ा दिखाने के लिए प्रिज़र्वेटिव्स और केमिकल्स के साथ तैयार की जाती है। इन पदार्थों का लगातार सेवन शरीर में सूजन (inflammation) को बढ़ा सकता है। लंबे समय में यह स्थिति हार्ट डिज़ीज़, डायबिटीज और इम्युनिटी कमजोर होने जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स रोज़ bread खाने से बचने की सलाह देते हैं।
डायबिटीज मरीजों के लिए bread का खतरा
bread ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ाती है, और डायबिटीज़ के मरीजों के लिए यह एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बन जाती है। अगर रोज़ bread खाई जाए, तो ब्लड शुगर का नियंत्रण बिगड़ सकता है, जिससे डायबिटिक जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर सफेद bread से खास दूरी बनाने की सलाह देते हैं।
क्या bread में पोषण कम होता है?
bread को पेट भरने वाला भोजन माना जाता है, लेकिन इसमें पोषक तत्व बहुत कम पाए जाते हैं। न इसमें पर्याप्त प्रोटीन होता है, न विटामिन और न ही मिनरल्स। लगातार bread खाने से शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता, जिससे थकान, कमजोरी और स्किन dullness जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं। bread को नाश्ते का मुख्य हिस्सा बनाने से न्यूट्रिशनल कमी होने का खतरा बढ़ जाता है।
bread का सेवन कैसे करें? सही तरीके जानें
हालांकि bread को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।
Whole Wheat Bread या Multigrain Bread का चुनाव करें।
bread को सीमित मात्रा में खाएँ, रोज़ न खाएँ।
bread के साथ प्रोटीन जोड़ें जैसे—अंडा, पनीर, दाल या पीनट बटर।
रात के खाने में bread से बचें, क्योंकि यह पचने में ज्यादा समय लेती है।
इन उपायों से bread का असर थोड़ा संतुलित किया जा सकता है।
निष्कर्ष:
कुल मिलाकर, bread एक आसान और स्वादिष्ट विकल्प ज़रूर है, लेकिन इसे रोज़ाना अपनी डाइट में शामिल करना सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसके लगातार सेवन से वजन बढ़ना, पाचन समस्याएँ, ब्लड शुगर का असंतुलन और पोषण की कमी जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि bread का सेवन सीमित मात्रा में करें और स्वस्थ विकल्पों को प्राथमिकता दें।
इस लेख को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद!
स्वस्थ रहें, जागरूक रहें!